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38 के हुए सिक्सर किंग युवी, भारत को दो विश्वकप दिलाने में निभाई थी अहम भूमिका

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नई दिल्ली, सिक्सर किंग के नाम से मशहूर पूर्व भारतीय चैंपियन ऑलराउंडर युवराज सिंह ऐसे क्रिकेटर हैं जो किसी परिचय के मोहताज नहीं। युवराज को आक्रामक बल्लेबाज माना जाता था जो किसी भी परिस्थिति में मैच का रुख सिर्फ अपने ही दम पर बदल देते थे। गगनचुम्बी छक्के लगाने के स्पेशलिस्ट कहे जाने वाले युवराज ने केवल अपने बल्ले से ही नहीं बल्कि फिरकी गेदबाजी से भी सामने वाली टीम के बल्लेबाजों को शिकार बनाया है। उन्होंने अपनी मेहनत से कई रिकॉर्ड बनाने के साथ वो सबकुछ कर दिखाया जो एक क्रिकेटर का सपना होता है। उन्होंने भारत को दो विश्वकप (2007 टी-20 और 2011 एकदिवसीय विश्वकप) का खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने भले चाहे क्रिकेट के सभी फॉर्मेटो से संन्यास ले लिया हो, लेकिन फैंस आज भी उन्हें लम्बे-लम्बे छक्के लगाते हुए देखने की ख्वाहिश रखते हैं। आज इसी चैंपियन बल्लेबाज का जन्मदिन है। युवराज आज अपना 38वां जन्मदिन मना रहे हैं।
युवराज का जन्म 12 दिसम्बर 1981 को चंडीगढ़ में हुआ था। इनके पिता का नाम योगराज सिंह है जोकि एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर रह चुके हैं। युवराज की माता का नाम शबनम सिंह है। युवराज को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था और उनका सपना भारतीय टीम के लिए खेलना था। युवराज ने 2015 में अभिनेत्री और भारतीय मूल की ब्रिटिश मॉडल हेजल कीच के साथ सगाई कर ली थी और 30 नवम्बर 2016 को उनके साथ विवाह सूत्र में बंध गए थे।
अंतरराष्ट्रीय कॅरियर
युवराज ने वर्ष 2000 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। उन्होंने अपना पहला एकदिवसीय मैच 2002 में केन्या के खिलाफ खेला था। इसके बाद युवराज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। युवराज ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 40 टेस्ट, 304 एकदिवसीय और 58 टी-20 मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 40 टेस्ट में 3 शतक और 11 अर्धशतक के साथ 1900 रन,  304 एकदिवसीय में 14 शतक और 52 अर्धशतक 8701 रन, टी-20 में आठ अर्धशतकों की मदद से 1177 रन बनाए हैं। इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर में कुल 148 विकेट भी लिए हैं। भारतीय टीम के इस चैंपियन ऑलराउंडर ने इसी वर्ष 14 जून को क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी थी।
छह गेंदों में छह छक्के
युवराज सिंह की बात हो तो 2007 में हुए पहले टी-20 विश्वकप में उनके द्वारा एक ओवर में लगाए गए छह छक्कों को कौन भूल सकता है। विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ डरबन में हुए मैच में युवी ने तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर की सभी छह गेंदों पर छक्के लगाए। वे अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में यह कमाल करने वाले पहले एवं एकमात्र बल्लेबाज हैं। उनके इस रिकॉर्ड की कोई बराबरी नहीं कर पाया है।
युवी ने इसी मैच में मात्र 12 गेंदों में अर्द्धशतक पूरा किया। यह भी अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट की सबसे तेज अर्धशतक है और यह रिकॉर्ड भी अभी तक कायम है। उन्होंने 12 गेंदों में 3 चौकों और 6 छक्कों की मदद से यह पचासा पूरा किया था।
2011 में एकदिवसीय विश्वकप में निभाई अहम भूमिका
भारत को 28 साल बाद एकदिवसीय क्रिकेट में विश्व कप का खिताब दिलाने में उनके योगदान को कोई भूल नहीं सकता है। उन्होंने विश्व कप में 90.50 के बेहतरीन औसत से 362 रन बनाने के साथ ही 15 विकेट भी लिए थे और वे ‘मैन ऑफ द सीरीज’ चुने गए थे। भारत की 2007 टी20 विश्व कप की जीत में भी उनकी उल्लेखनीय भूमिका थी।
कैंसर को दी मात
भारत को 2011 में विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाने के बाद युवराज को पता चला कि उन्हें मीडियास्टिनल सेमिनोमा नाम का दुर्लभ किस्म का कैंसर है। इसके बाद उन्होंने अमेरिका में इसका इलाज करवाया और जर्बदस्त जुझारुपन दिखाते हुए भारतीय टीम में वापसी की। हालांकि इसके बाद वे अपना पुराना फार्म हालिस नहीं कर पाए और ज्यादा समय तक टीम में नहीं बने रह पाए।
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