Sat. Nov 16th, 2019

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आशा कार्यकर्ताओं ने मांगों को लेकर किया प्रदर्शन

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मेरठ,  ऑल इंडिया आशा कार्यकर्ती वेलफेयर संगठन की मेरठ मंडल की अध्यक्ष निर्मेश त्यागी व उपाध्यक्ष रीमा के नेतृत्व में शुक्रवार को आशा एवं आशा संगिनी वर्कर्स की समस्याओं के संबंध में कमिश्नरी चौराहे पर धरना प्रदर्शन किया गया। इस दौरान जिलाधिकारी अनिल ढींगरा के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया।
निर्मेश त्यागी ने बताया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं कल्याण के अधीन देश में लगभग 10.25 लाख आशा एवं 1.10 लाख आशा सहयोगिनी कार्यरत हैं, जो ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने में अहम भूमिका निभा रही हैं। जैसे टीकाकरण, स्वच्छता, जच्चा-बच्चा देखभाल, संस्थागत प्रसव, पोलियो आदि।
राज्य सरकार इनसे कई अन्य कार्य भी संचालित कराती है। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार को मिलाकर 24 से अधिक आशा एवं आशा सहयोगिनी कार्य करती हैं। इसके बदले में उन्हें कोई मानदंड अथवा कोई वेतन नहीं दिया जाता। बल्कि अल्प प्रोत्साहन राशि का भुगतान मात्र कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि गत 11 सितम्बर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आशा आशा संगनियों से वार्तालाप करते हुए प्रोत्साहन राशि को दोगुना करने का ऐलान किया था, लेकिन मंत्रालय से 1000 की वृद्धि की गई। जोकि परिवार का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
उपाध्यक्ष रीमा ने बताया कि यदि आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो आशा वर्कर्स के प्रयासों से जच्चा बच्चा मृत्यु दर में भारी कमी आई है और व समाज में अंतिम असहाय व्यक्तियों तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचा रही हैं। अपनी मांगों को रखते हुए उन्होंने कहा कि हमारा जीवन स्तर सुदृढ़ करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारियों की भांति दर्जा दिया जाए। उनका बीमा कराया जाए तथा दुर्घटना में मृत्यु होने पर पांच लाख का मुआवजा दिया जाए। निर्मेश त्यागी ने कहा कि हमारी मांगे देशहित, मजदूर हित एवं महिला हित में हैं। सरकार को हमारी मांगों पर ध्यान देना चाहिए।
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