Sun. Oct 13th, 2019

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भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी किकेट एसो. ऑफ उत्तराखण्ड की इमारत

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एफीलेशन कमेटी की नगेटिव रिपोर्ट के बाद भी दे दी गई मान्यता
बीसीसीआई भी सवालों के घेरे में
हरिद्वार,  बीसीसआई से मान्यता मिलने के बाद से ही क्रिकेट एसो. ऑफ उाराखण्ड में भ्रष्टाचार व अनियमितता का बोलबाला रहा है। इसकी शुरूआत को ही गलत कहा जा सकता है। प्रदेश में बीसीसीआई की सवा करीम और अुशंमन गायकवाड के नेतृत्व में आई सलेक्शन कमेटी ने भी इस पर शुरूआती दौर में अपनी मोहर लगा दी थी।वहीं जिला किकेट एसो. हरिद्वार के सचिव पर एक खिलाड़ी द्वारा सलेक्शन की एवज में मोटी रकम मांगे जाने का आरोप लगाते हुए अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को बल दिया है।
उल्लेखनीय है  कि 17-18 जून 2019 को बीसीसीआई की एफीलेशन कमेटी में सबा करीम और अंशुमन गायकवाड का देहरादून दौरा हुआ था जिसके तहत दोनों कमेटी सदस्यों ने प्रदेश की सभी क्रिकेट एसो. के कागजात जिसमें आईटीआर, जिला इकाई की सदस्यता आदि का अवलोेकन किया था। इस दौरे में कमेटी ने एफीलेशन के लिए सबसे उपयुक्त उतरांचल क्रिकेट एसो. को पाया। कमेटी ने एसो. ऑफ क्रिकेट उतराखण्ड के कागजातों का भी अवलोकन करने के बाद अपनी रिपोर्ट बीसीसीआई को दी। रिपोर्ट में कमेटी ने सबसे बेहतरीन कार्य उत्तरांचल क्रिकेट एसो. का बताते हुए कहा कि एसो. द्वारा सभी नियम कायदों का पालन किया गया है। जबकि क्रिकेट एसो.आफ उत्तराखंड के संबंध में एसो. को तीन व्यक्तियों द्वारा संचालित होना और पारदर्शिता न अपनाए जाने की टिप्पणी की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि एसो. यूपी क्रिकेट एसो. द्वारा संचालित होती है। इन तथ्यों के आधार पर क्रिकेट एसो. ऑफ उत्तराखण्ड को मान्यता नहीं दी जा सकती।उसके अनुसार मान्यता दिए जाने के बाद भी एसो. यूपी पर ही निर्भर रहेगी। बीसीसीआई की कमेटी द्वारा वर्ष 2004 व 2009 में की गई जांच में भी उत्तरांचल क्रिकेट एसो. को बेहतर माना था। बावजूद इसके क्रिकेट एसो. आफ उत्तराखंड को मान्यता दी गई। इसी के साथ भ्रष्टाचार का खेल भी आरम्भ हो गया।
उल्लेखनीय है कि जिला किकेट एसो. हरिद्वार के सचिव इन्द्रमोहन बर्डथ्वाल पर हरिद्वार के एक खिलाड़ी के पिता ने सलेक्शन के लिए पांच लाख रुपये मांगे जाने का आरोप लगाया है। पीड़ित खिलाड़ी के पिता राजकुमार चौहान निवासी ग्राम धारीवाल, शीतलाखेड़ा, हरिद्वार ने अपने पुत्र के सलेक्शन की एवज मेें सचिव इन्द्र मोहन बर्डथ्वाल पर पांच लाख रुपये मांगे जाने का आरोप लगाया। जबकि इन्द्र मोहन बर्डथ्वाल के भाई बृजमोहन बर्डथ्वाल देहरादून में अपनी क्रिकेट एकेडमी का संचालन करते हैं। बीसीसीआई के नियमों के मुताबिक परिवार के सदस्य द्वारा किकेट एकेडमी का संचालन करने पर परिवार को कोई भी सदस्य एसो. का पदाधिकारी नहीं हो सकता। जबकि इन्द्रमोहन बर्डथ्वाल को हरिद्वार जिला किकेट का सचिव बनाया गया है। सबसे अहम् बात यह की बीसीसीआई की एफीलेशन कमेटी द्वारा अपनी रिपोर्ट दिए जाने के बाद भी एफिलेशन दिया गया जो की भ्रष्टाचार की ओर साफ इशारा करता है।
रिश्वत मांगने और भाई द्वारा एकेडमी चलाने के बाद भी सचिव बनने पर पूछे जाने पर इन्द्रमोहन बर्डथ्वाल ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी का सलेक्शन न होने पर इस प्रकार के आरोप लगाना कोई नई बात नहीं है। हर हारा हुआ इंसान ऐसे ही दूसरों पर आरोप लगाता है। भाई द्वारा एकेडमी चलाने के बाद उनके सचिव बनने और सलेक्शन के दौरान भाईयों की मौजूदगी के संबंध में श्री बर्डथ्वाल ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि परिवार के सदस्य द्वारा एकेडमी चलाने पर कोई पदाधिकारी नहीं बन सकता।उन्होंने कहा कि जहां तक मेरे संज्ञान में इस तरह का कोई नियम नहीं है। हालांकि वे इस सवाल का जवाब देने से बार-बार कतराते रहे। बावजूद इसके उन्होंने बीसीसीआई की एफिलेशन कमेटी और उसकी रिपोर्ट के बाद मान्यता दिए जाने के संबंध में कहा कि इसके संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। कमेटी ने क्या रिपोर्ट दी उसके संबंध में वे कुछ नहीं जानते। इन सबसे इतना तो स्पष्ट है कि एफिलेशन मिलने से पूर्व और बाद में  क्रिकेट एसो. आफ उत्तराखण्ड में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसके साथ ही प्रतिभावान खिलाड़ियों के साथ पूरी तरह से न्याय होता हो इसकी उम्मीद करना भी बेमानी होगा।
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