Fri. Sep 13th, 2019

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तीजा पर्व को लेकर सुहागिन महिलाओं में उत्साह

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कोरबा  तीजा पर्व को लेकर सुहागिन महिलाओं में उत्साह देखा जा रहा है। करू-भात खाकर सुहागिनें रविवार को तीजा उपवास रखेंगी। तीज और चतुर्थी का संयोग दो सितंबर सोमवार को होने के कारण कई महिलाएं दूसरे दिन भी उपवास रखेंगी। पर्व में शिव-पार्वती की पूजा कर पति दीर्घायु व परिवार की सुख समृद्धि की कामना की जाती है। तीजा पर्व को धूमधाम से मनाने के लिए बेटियां मायके पहुंचे लगी हैं।
सुहाग की दीर्घायु की कामना लेकर महिलाएं तीजा उपवास प्रतिवर्ष भादो माह के शुक्ल पक्ष तृतीया को रखती हैं। पर्व की शुरुआत भादो शुक्ल पक्ष द्वितीया से हो जाती है। इस दिन सुहागिनें करू भात अर्थात कड़वाहट युक्त सब्जी जैसे करेला के साथ भात खाकर दूसरे दिन उपवास रखेंगी। इस प्रयोजन का आशय यह कहा जा रहा है कि जीवन की कड़वाहट को पीकर सुखमय जीवन की ओर बढ़ने की सौगात मिलती है। यह एक ऐसा पर्व है जिसमें मायके जाने के लिए बेटियां उत्सुक रहती हैं। मायके पक्ष वाले विवाहित बेटियों को लिवा कर लाते हैं। बेटियों के लिए यह वह पर्व होता है जब अपने बचपन की सखी सहेलियों से मिलकर खुश होती हैं। तीजा पर्व की तैयारी को लेकर बाजार में उल्लास का वातावरण देखा जा रहा है। बाजार में रौनक देखी जा रही है। मन पसंद गहने व कपड़ों की खरीदारी करने के लिए सुहागिनें पहुंचने लगी है। विधि विधान से पूजा के पश्चात सुहागिनें रात भर जागकर भजन-कीर्तन करती हैं। तीजा पर्व की जनश्रुति के संबंध में ज्योतिषाचार्य मूलचंद शास्त्री की मानें तो हरतालिका तीज एक ऐसा पर्व है जिसे विधि विधान से पिता के घर रहकर करने से पार्वती को भगवान शिव की प्राप्ति हुई थी। यही वजह है कि इस पूजा को आज भी सुहागिनें पिता के घर यानी मायके में रहकर करती हैं। इस अवसर पर पिता या भाई अपनी बेटी बहनों को सुहाग सामग्री व साड़ी प्रदान करते हैं। तिजारिनों के मायके आगमन से पिछले कुछ दिनों से बसों व अन्य यात्री वाहनों में खासी भीड़ देखी जा रही है। शास्त्री की मानें तो तीज और चतुर्थी का संयोग सोमवार को रहेगा। इस आशय से इस दिन तीज के साथ गणेश की चतुर्थी उपवास रखकर पूजा श्रेष्ठ होगा।
ठेठरी खुरमी की मिठास
पर्व में बेसन से बनी नमकीन ठेठरी व गेहूं आटा व सूजी से मीठी खुरमी रोटी बनाने का विधान है। छत्तीसगढ़ी मिष्ठान्न नमकीन के तौर पर यह खाद्य प्रत्येक घरों में बनाया जाता है। त्योहार में चतुर्थी के दिन तीजा बासी खाने के लिए महिलाएं आसपास के पड़ोसी महिलाओं के साथ गांव पहुंची बेटियों को आमंत्रित करती हैं। इस दौरान ठेठरी खुरमी भेंट की जाती है। लोक परंपरा के रूप में मनाए जाने वाला यह पर्व न केवल गांव बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी धूमधाम से मनाया जाता है।
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