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बर्थडे स्पेशल: 51 के हुए रियल लाइफ पर फिल्में बनाने वाले मधुर

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फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर का जन्म 26 अगस्त 1968 को मुंबई में हुआ। मधुर ने आज निर्देशन के क्षेत्र में एक मुकाम हासिल किया है। लेकिन यह मुकाम उन्हें काफी संघर्षों के बाद मिला। मधुर के पिता बिजली कांट्रेक्टर और मां गृहणी थी और घर की आर्थिक स्थिति बहुत बुरी थी। जिसके कारण मधुर को अपनी पढाई भी छोड़नी पड़ी। मधुर को बचपन से ही फ़िल्में देखने का शौक था ,जिसके कारण उन्हें कई बार डांट-मार भी पड़ी। मधुर ने अपने कैरियर की शुरुआत 90 के दशक में की।
बहुत संघर्षों के बाद उन्हें राम गोपाल वर्मा के साथ बतौर असिस्टेंट काम करने का मौका मिला। उस समय राम गोपाल वर्मा फिल्म ‘रात’ बना रहे थे। इसके बाद मधुर ने उन्हें ‘रंगीला’ और’ शिवा’ में असिस्ट किया। फिल्म ‘रंगीला’ में मधुर ने एक छोटी सी भूमिका भी निभाई थी। यह फिल्म हिट रही। इसके बाद मधुर को लगा की वह अब फिल्म बना सकते है। वह अपने फिल्म की कहानी लेकर एक प्रोड्यसूर के पास गए। लेकिन फिल्म की कहानी सुनने के बाद प्रोड्यूसर ने कड़वे शब्दों के साथ मना कर दिया। जिससे मधुर को गहरा झटका लगा। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और फिल्म त्रिशक्ति बनाई। यह फिल्म स्क्रीन पर कुछ घंटे भी नहीं चल पाई। स्थिति यह हो गई कि राम गोपाल के असिस्टेंट के रूप में कमाई गई इज्जत भी अब दांव पर लग गई और लोग उन्हें अपशकुन समझ कर कन्नी काटने लगे थे।
पिछली फिल्म की नाकामी से टूट चुके मधुर के एक दोस्त स्टॉक मार्केट में काम करते थे।  एक रोज वो मधुर को लेकर डांस बार गए। मधुर उस वक्त बहुत ‘शर्मिंदगी महसूस कर रहे थे। मधुर को इस बात का डर था कि कहीं किसी ने उन्हें पहचान लिया तो कहेगा कि फिल्म की नाकामी भुलाने के लिए वो शराबखाने आए हैं। इसके बाद मधुर वहां से निकल गए। लेकिन रात भर उनकी आँखों में बार के दृश्य छाये रहे और अगले दिन वह स्वयं अपने दोस्त को बार लेकर गए।  मधुर ने उस बार में काम करने वाली लड़कियों की कहानी सुनी और उसका संग्रह तैयार किया। इसके बाद वह समय आया जब मधुर ने सबकुछ भूलकर बनाई फिल्म ‘चांदनी बार’।इस फिल्म की सफलता ने उन्हें हिंदी फिल्म के प्रसिद्ध निर्देशकों में शुमार कर दिया। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद मधुर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। ‘दिल तो बच्चा है जी’,जेल, फैशन, ट्रैफिक सिग्नल, कॉर्पोरेट, पेज 3, आन – मैन एट वर्क आदि उनकी प्रमुख फ़िल्में है। मधुर को पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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